वालों को मार कर भाग जाएगा। महल के अंदर रोशनी भी खूब कर दी गई, तमाम महल दिन की तरह चमक रहा था।
आधी रात बीतने ही वाली थी कि पूरब की छत से छः आदमी धमाधम कूद कर धड़धड़ाते हुए उस भीड़ के बीच में आ कर खड़े हो गए, जहाँ बहुत से बहादुर बैठे और खड़े थे। सबके आगे वही आफत खाँ बद्रीनाथ का सिर हाथ में लटकाए हुए था।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : तेरहवां बयान)
खोह वाले तिलिस्म के अंदर बाग में कुँवर वीरेंद्रसिंह और योगी जी मे बातचीत होने
वालों को मार कर भाग जाएगा। महल के अंदर रोशनी भी खूब कर दी गई, तमाम महल दिन की तरह चमक रहा था।
आधी रात बीतने ही वाली थी कि पूरब की छत से छः आदमी धमाधम कूद कर धड़धड़ाते हुए उस भीड़ के बीच में आ कर खड़े हो गए, जहाँ बहुत से बहादुर बैठे और खड़े थे। सबके आगे वही आफत खाँ बद्रीनाथ का सिर हाथ में लटकाए हुए था।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : तेरहवां बयान)
खोह वाले तिलिस्म के अंदर बाग में कुँवर वीरेंद्रसिंह और योगी जी मे बातचीत होने