लगी जिसे वनकन्या और इनके ऐयार बखूबी सुन रहे थे।
कुमार – ‘पहले यह कहिए चंद्रकांता जीती है या मर गई?’
योगी – ‘राम-राम, चंद्रकांता को कोई मार सकता है? वह बहुत अच्छी तरह से इस दुनिया में मौजूद है।’
कुमार – ‘क्या उससे और मुझसे फिर मुलाकात होगी?’
योगी – ‘जरूर होगी।’
कुमार – ‘कब?’
योगी – (वनकन्या की तरफ इशारा करके) – ‘जब यह चाहेगी।’
इतना सुन कुमार वनकन्या की तरफ देखने लगे। इस वक्त उसकी अजीब हालत थी। बदन में घड़ी-घड़ी कँपकँपी हो रही थी,
लगी जिसे वनकन्या और इनके ऐयार बखूबी सुन रहे थे।
कुमार – ‘पहले यह कहिए चंद्रकांता जीती है या मर गई?’
योगी – ‘राम-राम, चंद्रकांता को कोई मार सकता है? वह बहुत अच्छी तरह से इस दुनिया में मौजूद है।’
कुमार – ‘क्या उससे और मुझसे फिर मुलाकात होगी?’
योगी – ‘जरूर होगी।’
कुमार – ‘कब?’
योगी – (वनकन्या की तरफ इशारा करके) – ‘जब यह चाहेगी।’
इतना सुन कुमार वनकन्या की तरफ देखने लगे। इस वक्त उसकी अजीब हालत थी। बदन में घड़ी-घड़ी कँपकँपी हो रही थी,