तेजसिंह ने एक आदमी से कहा – ‘आग सुलगाओ और इन लोहे की सींखों को उसमें गरम करो।’
अब उस डाकू से न रहा गया, उसने डरते हुए पूछा – ‘क्यों तेजसिंह, इन सींखों को तपा कर क्या करोगे?’
तेजसिंह – ‘इनको लाल करके दो तुम्हारी दोनों आँखों में, दो दोनों कानों में और एक सलाख मुँह खोल कर पेट के अंदर पहुँचाई जाएगी।’
डाकू – ‘आप लोग तो रहमदिल कहलाते हैं, फिर इस तरह तकलीफ दे कर किसी को मारना क्या आप लोगों की रहमदिली में बट्टा न लगाएगा?’
तेजसिंह ने एक आदमी से कहा – ‘आग सुलगाओ और इन लोहे की सींखों को उसमें गरम करो।’
अब उस डाकू से न रहा गया, उसने डरते हुए पूछा – ‘क्यों तेजसिंह, इन सींखों को तपा कर क्या करोगे?’
तेजसिंह – ‘इनको लाल करके दो तुम्हारी दोनों आँखों में, दो दोनों कानों में और एक सलाख मुँह खोल कर पेट के अंदर पहुँचाई जाएगी।’
डाकू – ‘आप लोग तो रहमदिल कहलाते हैं, फिर इस तरह तकलीफ दे कर किसी को मारना क्या आप लोगों की रहमदिली में बट्टा न लगाएगा?’