चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



तेजसिंह ने एक आदमी से कहा – ‘आग सुलगाओ और इन लोहे की सींखों को उसमें गरम करो।’

अब उस डाकू से न रहा गया, उसने डरते हुए पूछा – ‘क्यों तेजसिंह, इन सींखों को तपा कर क्या करोगे?’

तेजसिंह – ‘इनको लाल करके दो तुम्हारी दोनों आँखों में, दो दोनों कानों में और एक सलाख मुँह खोल कर पेट के अंदर पहुँचाई जाएगी।’

डाकू – ‘आप लोग तो रहमदिल कहलाते हैं, फिर इस तरह तकलीफ दे कर किसी को मारना क्या आप लोगों की रहमदिली में बट्टा न लगाएगा?’


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तेजसिंह ने एक आदमी से कहा – ‘आग सुलगाओ और इन लोहे की सींखों को उसमें गरम करो।’

अब उस डाकू से न रहा गया, उसने डरते हुए पूछा – ‘क्यों तेजसिंह, इन सींखों को तपा कर क्या करोगे?’

तेजसिंह – ‘इनको लाल करके दो तुम्हारी दोनों आँखों में, दो दोनों कानों में और एक सलाख मुँह खोल कर पेट के अंदर पहुँचाई जाएगी।’

डाकू – ‘आप लोग तो रहमदिल कहलाते हैं, फिर इस तरह तकलीफ दे कर किसी को मारना क्या आप लोगों की रहमदिली में बट्टा न लगाएगा?’


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