चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



डाकू – ‘मैं ठीक-ठीक हाल कह दूँगा।’

तेजसिंह – ‘हम लोग कैसे जानेंगे कि तुम सच्चे हो?’

डाकू – ‘साबित कर दूँगा कि मैं सच्चा हूँ।’

तेजसिंह – ‘अच्छा कहो।’

डाकू – ‘सुनो कहता हूँ।’

इस वक्त दरबार में भीड़ लगी हुई थी। तेजसिंह ने आग की अंगीठी क्यों मँगाई? ये लोहे की सलाइएँ किस काम आएँगी? यह डाकू अपना ठीक-ठीक हाल कहेगा या नहीं? यह कौन है? इत्यादि बातों को जानने के लिए सभी की तबीयत घबरा रही थी। सभी की निगाहें उस डाकू के ऊपर


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डाकू – ‘मैं ठीक-ठीक हाल कह दूँगा।’

तेजसिंह – ‘हम लोग कैसे जानेंगे कि तुम सच्चे हो?’

डाकू – ‘साबित कर दूँगा कि मैं सच्चा हूँ।’

तेजसिंह – ‘अच्छा कहो।’

डाकू – ‘सुनो कहता हूँ।’

इस वक्त दरबार में भीड़ लगी हुई थी। तेजसिंह ने आग की अंगीठी क्यों मँगाई? ये लोहे की सलाइएँ किस काम आएँगी? यह डाकू अपना ठीक-ठीक हाल कहेगा या नहीं? यह कौन है? इत्यादि बातों को जानने के लिए सभी की तबीयत घबरा रही थी। सभी की निगाहें उस डाकू के ऊपर


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