दो घंटे बाद दरबार के बाहर से शोरगुल की आवाज आने लगी। सभी का ख्याल उसी तरफ गया। एक चोबदार ने आ कर अर्ज किया कि पंडित बद्रीनाथ उस खूनी को पकड़े लिए आ रहे हैं।
उस खूनी को कमंद से बाँधे साथ लिए हुए पंडित बद्रीनाथ आ पहुँचे।
महाराज – ‘बद्रीनाथ, कुछ यह भी मालूम हुआ कि यह कौन है?’
बद्रीनाथ – ‘कुछ नहीं बताता कि कौन है और न बताएगा।’
महाराज – ‘फिर?’
बद्रीनाथ – ‘फिर क्या? मुझे तो मालूम होता है कि इसने अपनी सूरत बदल रखी है।’
दो घंटे बाद दरबार के बाहर से शोरगुल की आवाज आने लगी। सभी का ख्याल उसी तरफ गया। एक चोबदार ने आ कर अर्ज किया कि पंडित बद्रीनाथ उस खूनी को पकड़े लिए आ रहे हैं।
उस खूनी को कमंद से बाँधे साथ लिए हुए पंडित बद्रीनाथ आ पहुँचे।
महाराज – ‘बद्रीनाथ, कुछ यह भी मालूम हुआ कि यह कौन है?’
बद्रीनाथ – ‘कुछ नहीं बताता कि कौन है और न बताएगा।’
महाराज – ‘फिर?’
बद्रीनाथ – ‘फिर क्या? मुझे तो मालूम होता है कि इसने अपनी सूरत बदल रखी है।’