पानी मँगवा कर उसका चेहरा धुलवाया गया, अब तो उसकी दूसरी ही सूरत निकल आई।
भीड़ लगी थी, सभी में खलबली पड़ गई, मालूम होता था कि इसे सब कोई पहचानते हैं। महाराज चौंक पड़े और तेजसिंह की तरफ देख कर बोले – ‘बस-बस मालूम हो गया, यह तो नाजिम का साला है, मैं ख्याल करता हूँ कि जालिम खाँ वगैरह जो कैद हैं वे भी नाजिम और अहमद के रिश्तेदार ही होंगे। उन लोगों को फिर यहाँ लाना चाहिए।’
महाराज के हुक्म से जालिम खाँ वगैरह भी दरबार में लाए गए।
पानी मँगवा कर उसका चेहरा धुलवाया गया, अब तो उसकी दूसरी ही सूरत निकल आई।
भीड़ लगी थी, सभी में खलबली पड़ गई, मालूम होता था कि इसे सब कोई पहचानते हैं। महाराज चौंक पड़े और तेजसिंह की तरफ देख कर बोले – ‘बस-बस मालूम हो गया, यह तो नाजिम का साला है, मैं ख्याल करता हूँ कि जालिम खाँ वगैरह जो कैद हैं वे भी नाजिम और अहमद के रिश्तेदार ही होंगे। उन लोगों को फिर यहाँ लाना चाहिए।’
महाराज के हुक्म से जालिम खाँ वगैरह भी दरबार में लाए गए।