से जाए मगर अपने मुँह से अपना कुछ हाल कभी न कहना चाहिए।’
जालिम – (जोर से) ‘ऐसा ही होगा।’
इन दोनों की बातचीत से महाराज को बड़ा क्रोध आया। आँखें लाल हो गईं, बदन काँपने लगा। तेजसिंह और बद्रीनाथ की तरफ देख कर बोले – ‘बस हमको इन लोगों का हाल मालूम करने की कोई जरूरत नहीं, चाहे जो हो, अभी, इसी वक्त, इसी जगह, मेरे सामने इन लोगों का सिर धाड़ से अलग कर दिया जाए।’
हुक्म की देर थी, तमाम शहर इन डाकुओं के खून का प्यासा हो रहा था,
से जाए मगर अपने मुँह से अपना कुछ हाल कभी न कहना चाहिए।’
जालिम – (जोर से) ‘ऐसा ही होगा।’
इन दोनों की बातचीत से महाराज को बड़ा क्रोध आया। आँखें लाल हो गईं, बदन काँपने लगा। तेजसिंह और बद्रीनाथ की तरफ देख कर बोले – ‘बस हमको इन लोगों का हाल मालूम करने की कोई जरूरत नहीं, चाहे जो हो, अभी, इसी वक्त, इसी जगह, मेरे सामने इन लोगों का सिर धाड़ से अलग कर दिया जाए।’
हुक्म की देर थी, तमाम शहर इन डाकुओं के खून का प्यासा हो रहा था,