चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



बद्रीनाथ – (जालिम खाँ की तरफ देख कर) ‘अब तुम लोग पहचाने गए कि नाजिम और अहमद के रिश्तेदार हो, तुम्हारे साथी ने बता दिया।’

जालिम खाँ इसका कुछ जवाब देना ही चाहता था कि वह खूनी (जिसे बद्रीनाथ अभी गिरफ्तार करके लाए थे) बोल उठा – ‘जालिम खाँ, तुम बद्रीनाथ के फेर में मत पड़ना, यह झूठे हैं। तुम्हारे साथी को हमने कुछ कहने का मौका नहीं दिया, वह बड़ा ही डरपोक था, मैंने उसे दोजख में पहुँचा दिया। हम लोगों की जान चाहे जिस दुर्दशा


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बद्रीनाथ – (जालिम खाँ की तरफ देख कर) ‘अब तुम लोग पहचाने गए कि नाजिम और अहमद के रिश्तेदार हो, तुम्हारे साथी ने बता दिया।’

जालिम खाँ इसका कुछ जवाब देना ही चाहता था कि वह खूनी (जिसे बद्रीनाथ अभी गिरफ्तार करके लाए थे) बोल उठा – ‘जालिम खाँ, तुम बद्रीनाथ के फेर में मत पड़ना, यह झूठे हैं। तुम्हारे साथी को हमने कुछ कहने का मौका नहीं दिया, वह बड़ा ही डरपोक था, मैंने उसे दोजख में पहुँचा दिया। हम लोगों की जान चाहे जिस दुर्दशा


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