चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



सब्ज सखी – ‘आखिर कुमार के ऐयार हम लोगों का पता नहीं ही लगा सके।’

सुर्ख सखी – ‘खुद ज्योतिषी जी की अक्ल चकरा गई, जो बड़े रम्माल और नजूमी कहलाते थे, दूसरों की कौन कहे।’

वनकन्या – ‘ज्योतिषी जी के रमल को तो इन यंत्रों ने बेकार कर दिया, जो सिद्धनाथ बाबा ने हम लोगों के गले में डाल दिया है और अभी तक जिसे उतारने नहीं देते।’

सब्ज सखी – ‘मालूम नहीं इस ताबीज (यंत्र) में कौन-सी ऐसी चीज है जो रमल को चलने नहीं देती।’

वनकन्या –


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सब्ज सखी – ‘आखिर कुमार के ऐयार हम लोगों का पता नहीं ही लगा सके।’

सुर्ख सखी – ‘खुद ज्योतिषी जी की अक्ल चकरा गई, जो बड़े रम्माल और नजूमी कहलाते थे, दूसरों की कौन कहे।’

वनकन्या – ‘ज्योतिषी जी के रमल को तो इन यंत्रों ने बेकार कर दिया, जो सिद्धनाथ बाबा ने हम लोगों के गले में डाल दिया है और अभी तक जिसे उतारने नहीं देते।’

सब्ज सखी – ‘मालूम नहीं इस ताबीज (यंत्र) में कौन-सी ऐसी चीज है जो रमल को चलने नहीं देती।’

वनकन्या –


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