चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

इसमें बहुत कुछ असर है। देखिए मैं सूरजमुखी बन कर गई थी, तब भी ज्योतिषी जी रमल से न बता सके कि यह ऐयार है।’

वनकन्या – ‘कुमार तो खूब ही छके होंगे?’

सुर्ख सखी – ‘कुछ न पूछिए, वे बहुत ही घबराए कि यह शैतान कहाँ से आई और क्या शर्त करा के अब क्या चाहती है?’

सब्ज सखी – ‘उसी के थोड़ी देर पहले मैं प्यादा बन कर खत का जवाब लेने गई थी और देवीसिंह को चेला बनाया था। यह कोई नहीं कह सका कि इसे मैं पहचानता हूँ।’

सुर्ख सखी – यह सब तो


1127 of 1230

इसमें बहुत कुछ असर है। देखिए मैं सूरजमुखी बन कर गई थी, तब भी ज्योतिषी जी रमल से न बता सके कि यह ऐयार है।’

वनकन्या – ‘कुमार तो खूब ही छके होंगे?’

सुर्ख सखी – ‘कुछ न पूछिए, वे बहुत ही घबराए कि यह शैतान कहाँ से आई और क्या शर्त करा के अब क्या चाहती है?’

सब्ज सखी – ‘उसी के थोड़ी देर पहले मैं प्यादा बन कर खत का जवाब लेने गई थी और देवीसिंह को चेला बनाया था। यह कोई नहीं कह सका कि इसे मैं पहचानता हूँ।’

सुर्ख सखी – यह सब तो


1127 of 1230