हुई मगर किस्मत भी कोई भारी चीज है। देखिए जब शिवदत्त के ऐयारों ने तिलिस्मी किताब चुराई थी और जंगल में ले जा कर जमीन के अंदर गाड़ रहे थे, उसी वक्त इत्तिफाक से हम लोगों ने पहुँच कर दूर से देख लिया कि कुछ गाड़ रहे हैं, उन लोगों के जाने के बाद खोद कर देखा तो तिलिस्मी किताब है।
वनकन्या – ‘ओफ, बड़ी मुश्किल से सिद्धनाथ ने हम लोगों को घूमने का हुक्म दिया था, इस पर भी कसम दे दी थी कि दूर-दूर से कुमार को देखना, पास मत जाना।’
सुर्ख सखी – ‘इसमें तुम्हारा ही फायदा था,
हुई मगर किस्मत भी कोई भारी चीज है। देखिए जब शिवदत्त के ऐयारों ने तिलिस्मी किताब चुराई थी और जंगल में ले जा कर जमीन के अंदर गाड़ रहे थे, उसी वक्त इत्तिफाक से हम लोगों ने पहुँच कर दूर से देख लिया कि कुछ गाड़ रहे हैं, उन लोगों के जाने के बाद खोद कर देखा तो तिलिस्मी किताब है।
वनकन्या – ‘ओफ, बड़ी मुश्किल से सिद्धनाथ ने हम लोगों को घूमने का हुक्म दिया था, इस पर भी कसम दे दी थी कि दूर-दूर से कुमार को देखना, पास मत जाना।’
सुर्ख सखी – ‘इसमें तुम्हारा ही फायदा था,