सब्ज सखी – ‘हकीकत में सिद्धनाथ ने कुमार और उनके ऐयारों को बड़ा भारी धोखा दिया। उन लोगों को इस बात का ख्याल तक न आया कि इस खोह वाले तिलिस्म को सिद्धनाथ बाबा हम लोगों के हाथ फतह करा रहे हैं।’
सुर्ख सखी – ‘जब हम लोग अंदर से इस खोह का दरवाजा बंद कर तिलिस्म तोड़ रहे थे तब तेजसिंह, बद्रीनाथ की गठरी ले कर इसमें आए थे, मगर दरवाजा बंद पाकर लौट गए।’
वनकन्या – ‘बड़ा ही घबराए होंगे कि अंदर से इसका दरवाजा किसने बंद कर दिया?’
सुर्ख
सब्ज सखी – ‘हकीकत में सिद्धनाथ ने कुमार और उनके ऐयारों को बड़ा भारी धोखा दिया। उन लोगों को इस बात का ख्याल तक न आया कि इस खोह वाले तिलिस्म को सिद्धनाथ बाबा हम लोगों के हाथ फतह करा रहे हैं।’
सुर्ख सखी – ‘जब हम लोग अंदर से इस खोह का दरवाजा बंद कर तिलिस्म तोड़ रहे थे तब तेजसिंह, बद्रीनाथ की गठरी ले कर इसमें आए थे, मगर दरवाजा बंद पाकर लौट गए।’
वनकन्या – ‘बड़ा ही घबराए होंगे कि अंदर से इसका दरवाजा किसने बंद कर दिया?’
सुर्ख