देवीसिंह और ज्योतिषी जी कैसा छके, हम लोगों ने सभी कपड़े तक ले लिए।’
सब्ज सखी – हम लोग तो जान-बूझ कर उन लोगों को अपने साथ लाए ही थे।’
वनकन्या – ‘चाहे वे लोग कितने ही तेज हों, मगर हमारे सिद्धनाथ को नहीं पा सकते। हाँ, उन लोगों में तेजसिंह बड़ा चालाक है।’
सुर्ख सखी – ‘तेजसिंह बहुत चालाक हैं तो क्या हुआ, मगर हमारे सिद्धनाथ तेजसिंह के भी बाप हैं।’
वनकन्या – (हँस कर) ‘इसका हाल तो तुम ही जानो।’
सुर्ख सखी – ‘आप तो दिल्लगी करती हैं।’
देवीसिंह और ज्योतिषी जी कैसा छके, हम लोगों ने सभी कपड़े तक ले लिए।’
सब्ज सखी – हम लोग तो जान-बूझ कर उन लोगों को अपने साथ लाए ही थे।’
वनकन्या – ‘चाहे वे लोग कितने ही तेज हों, मगर हमारे सिद्धनाथ को नहीं पा सकते। हाँ, उन लोगों में तेजसिंह बड़ा चालाक है।’
सुर्ख सखी – ‘तेजसिंह बहुत चालाक हैं तो क्या हुआ, मगर हमारे सिद्धनाथ तेजसिंह के भी बाप हैं।’
वनकन्या – (हँस कर) ‘इसका हाल तो तुम ही जानो।’
सुर्ख सखी – ‘आप तो दिल्लगी करती हैं।’