– ‘आपके हुक्म के मुताबिक महाराज जयसिंह और अपने पिता को खोह के बाहर छोड़ कर आपसे मिलने आया हूँ।’
सिद्धनाथ – ‘बहुत अच्छा किया जो उन लोगों को ले आए, आज कुमारी चंद्रकांता से आप लोग जरूर मिलोगे।’
तेजसिंह – ‘आपकी कृपा है तो ऐसा ही होगा।’
सिद्धनाथ – ‘कहो और तो सब कुशल है? विजयगढ़ और नौगढ़ में किसी तरह का उत्पात तो नहीं हुआ था।’
तेजसिंह – (ताज्जुब से उनकी तरफ देख कर) ‘हाँ, उत्पात तो हुआ था, कोई जालिम खाँ, नामी दोनों राजाओं का दुश्मन पैदा हुआ था।’
– ‘आपके हुक्म के मुताबिक महाराज जयसिंह और अपने पिता को खोह के बाहर छोड़ कर आपसे मिलने आया हूँ।’
सिद्धनाथ – ‘बहुत अच्छा किया जो उन लोगों को ले आए, आज कुमारी चंद्रकांता से आप लोग जरूर मिलोगे।’
तेजसिंह – ‘आपकी कृपा है तो ऐसा ही होगा।’
सिद्धनाथ – ‘कहो और तो सब कुशल है? विजयगढ़ और नौगढ़ में किसी तरह का उत्पात तो नहीं हुआ था।’
तेजसिंह – (ताज्जुब से उनकी तरफ देख कर) ‘हाँ, उत्पात तो हुआ था, कोई जालिम खाँ, नामी दोनों राजाओं का दुश्मन पैदा हुआ था।’