सिद्धनाथ – ‘हाँ, यह तो मालूम है, बेशक पंडित बद्रीनाथ अपने फन में बड़ा उस्ताद है, अच्छी चालाकी से उसे गिरफ्तार किया। खूब हुआ जो वे लोग मारे गए, अब उनके संगी-साथियों का दोनों राजों से दुश्मनी करने का हौसला न पड़ेगा। आओ टहलते-टहलते हम लोग बात करें।’
कुमार – ‘बहुत अच्छा।’
तेजसिंह – ‘जब आपको यह सब मालूम है तो यह भी जरूर मालूम होगा कि जालिम खाँ कौन था?’
सिद्धनाथ – ‘यह तो नहीं मालूम कि वह कौन था मगर अंदाज से मालूम होता है
सिद्धनाथ – ‘हाँ, यह तो मालूम है, बेशक पंडित बद्रीनाथ अपने फन में बड़ा उस्ताद है, अच्छी चालाकी से उसे गिरफ्तार किया। खूब हुआ जो वे लोग मारे गए, अब उनके संगी-साथियों का दोनों राजों से दुश्मनी करने का हौसला न पड़ेगा। आओ टहलते-टहलते हम लोग बात करें।’
कुमार – ‘बहुत अच्छा।’
तेजसिंह – ‘जब आपको यह सब मालूम है तो यह भी जरूर मालूम होगा कि जालिम खाँ कौन था?’
सिद्धनाथ – ‘यह तो नहीं मालूम कि वह कौन था मगर अंदाज से मालूम होता है