कि शायद नाजिम और अहमद के रिश्तेदारों में से कोई होगा।’
कुमार – ‘ठीक है, जो आप सोचते हैं वही होगा।’
सिद्धनाथ – ‘महाराज शिवदत्त तो जंगल में चले गए?’
कुमार – ‘जी हाँ, वे तो हमारे पिता से कह गए हैं कि अब तपस्या करेंगे।’
सिद्धनाथ – ‘जो हो मगर दुश्मन का विश्वास कभी नहीं करना चाहिए।’
कुमार – ‘क्या वह फिर दुश्मनी पर कमर बाँधेगे ?’
सिद्धनाथ – ‘कौन ठिकाना?’
कुमार – ‘अब हुक्म हो तो बाहर जा कर अपने पिता और महाराज जयसिंह को ले आऊँ।’
कि शायद नाजिम और अहमद के रिश्तेदारों में से कोई होगा।’
कुमार – ‘ठीक है, जो आप सोचते हैं वही होगा।’
सिद्धनाथ – ‘महाराज शिवदत्त तो जंगल में चले गए?’
कुमार – ‘जी हाँ, वे तो हमारे पिता से कह गए हैं कि अब तपस्या करेंगे।’
सिद्धनाथ – ‘जो हो मगर दुश्मन का विश्वास कभी नहीं करना चाहिए।’
कुमार – ‘क्या वह फिर दुश्मनी पर कमर बाँधेगे ?’
सिद्धनाथ – ‘कौन ठिकाना?’
कुमार – ‘अब हुक्म हो तो बाहर जा कर अपने पिता और महाराज जयसिंह को ले आऊँ।’