चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



कुमार – ‘प्रणाम करता हूँ।’

बाबा – ‘इसकी कोई जरूरत नहीं, क्योंकि आज ही तुम फिर लौटोगे।’

तेजसिंह – ‘दंडवत।’

बाबा – ‘तुमको तो जन्म भर दंडवत करने का मौका मिलेगा, मगर इस वक्त इस बात का ख्याल रखना कि तुम लोगों की जबानी कुमारी से मिलने का हाल खोह के बाहर वाले न सुनें और आते वक्त अगर दिन थोड़ा रहे तो आज मत आना।’

तेजसिंह – ‘जी नहीं हम लोग क्यों कहने लगे।’

बाबा – ‘अच्छा जाओ।’

दोनों आदमी सिद्धनाथ बाबा से विदा हो, उसी मालूमी राह से घूमते-फिरते खोह के बाहर आए।


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कुमार – ‘प्रणाम करता हूँ।’

बाबा – ‘इसकी कोई जरूरत नहीं, क्योंकि आज ही तुम फिर लौटोगे।’

तेजसिंह – ‘दंडवत।’

बाबा – ‘तुमको तो जन्म भर दंडवत करने का मौका मिलेगा, मगर इस वक्त इस बात का ख्याल रखना कि तुम लोगों की जबानी कुमारी से मिलने का हाल खोह के बाहर वाले न सुनें और आते वक्त अगर दिन थोड़ा रहे तो आज मत आना।’

तेजसिंह – ‘जी नहीं हम लोग क्यों कहने लगे।’

बाबा – ‘अच्छा जाओ।’

दोनों आदमी सिद्धनाथ बाबा से विदा हो, उसी मालूमी राह से घूमते-फिरते खोह के बाहर आए।


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