मगर सूरत देखने से मुहब्बत की मजबूत फाँसें गले में पड़ जाती थीं। इस वक्त भी उनकी यही दशा हुई। यह सोच कर कि कुमारी को इसने कैद किया है एकदम गुस्सा चढ़ आया मगर कब तक? जब तक कि जमीन की तरफ देख कर सोचते रहे, जहाँ सिर उठा कर वनकन्या की तरफ देखा, गुस्सा बिल्कुल जाता रहा, ख्याल ही दूर हो गए, पहले कुछ सोचा था अब कुछ और ही सोचने लगे – ‘नहीं-नहीं, यह बेचारी हमारी दुश्मन नहीं है। राम-राम, न मालूम क्यों ऐसा ख्याल मेरे दिल में आ गया।
मगर सूरत देखने से मुहब्बत की मजबूत फाँसें गले में पड़ जाती थीं। इस वक्त भी उनकी यही दशा हुई। यह सोच कर कि कुमारी को इसने कैद किया है एकदम गुस्सा चढ़ आया मगर कब तक? जब तक कि जमीन की तरफ देख कर सोचते रहे, जहाँ सिर उठा कर वनकन्या की तरफ देखा, गुस्सा बिल्कुल जाता रहा, ख्याल ही दूर हो गए, पहले कुछ सोचा था अब कुछ और ही सोचने लगे – ‘नहीं-नहीं, यह बेचारी हमारी दुश्मन नहीं है। राम-राम, न मालूम क्यों ऐसा ख्याल मेरे दिल में आ गया।