इससे बढ़ कर तो कोई दोस्त दिखाई ही नहीं देता। अगर यह हमारी मदद न करती तो तिलिस्म का टूटना मुश्किल हो जाता, कुमारी के मिलने की उम्मीद जाती रहती, बल्कि मैं खुद दुश्मनों के हाथ पड़ जाता।’
कुमार क्या, सभी के ही दिल में एकदम यह बात पैदा हुई कि इस बाग और पहाड़ी की मालिक अगर यह है तो इसी ने कुमारी को भी कैद कर रखा होगा।
आखिर महाराज जयसिंह से न रहा गया, सिद्धनाथ की तरफ देख कर पूछा – ‘बेचारी चंद्रकांता इस खोह में फँस कर इन्हीं की कैद में पड़ गई होगी?’
इससे बढ़ कर तो कोई दोस्त दिखाई ही नहीं देता। अगर यह हमारी मदद न करती तो तिलिस्म का टूटना मुश्किल हो जाता, कुमारी के मिलने की उम्मीद जाती रहती, बल्कि मैं खुद दुश्मनों के हाथ पड़ जाता।’
कुमार क्या, सभी के ही दिल में एकदम यह बात पैदा हुई कि इस बाग और पहाड़ी की मालिक अगर यह है तो इसी ने कुमारी को भी कैद कर रखा होगा।
आखिर महाराज जयसिंह से न रहा गया, सिद्धनाथ की तरफ देख कर पूछा – ‘बेचारी चंद्रकांता इस खोह में फँस कर इन्हीं की कैद में पड़ गई होगी?’