बाबा जी – ‘नहीं, जिस वक्त कुमारी चंद्रकांता इस खोह में फँसी थी उस वक्त यहाँ का मालिक कोई न था, उसके बाद यह पहाड़ी बाग और मकान इनको मिला है।’
सिद्धनाथ बाबा की इस दूसरी बात ने और भ्रम में डाल दिया, यहाँ तक कि कुमार का जी घबराने लगा। अगर महाराज जयसिंह और सुरेंद्रसिंह यहाँ न होते तो जरूर कुमार चिल्ला उठते, मगर नहीं – शर्म ने मुँह बंद कर दिया और गंभीरता ने दोनों मोढ़ों पर हाथ धर कर नीचे की तरफ दबाया।
महाराज जयसिंह और सुरेंद्रसिंह से न रहा गया,
बाबा जी – ‘नहीं, जिस वक्त कुमारी चंद्रकांता इस खोह में फँसी थी उस वक्त यहाँ का मालिक कोई न था, उसके बाद यह पहाड़ी बाग और मकान इनको मिला है।’
सिद्धनाथ बाबा की इस दूसरी बात ने और भ्रम में डाल दिया, यहाँ तक कि कुमार का जी घबराने लगा। अगर महाराज जयसिंह और सुरेंद्रसिंह यहाँ न होते तो जरूर कुमार चिल्ला उठते, मगर नहीं – शर्म ने मुँह बंद कर दिया और गंभीरता ने दोनों मोढ़ों पर हाथ धर कर नीचे की तरफ दबाया।
महाराज जयसिंह और सुरेंद्रसिंह से न रहा गया,