पोशाक वाली चपला और सब्ज पोशाक वाली चंपा साफ पहचानी गईं। मारे खुशी के सबों का चेहरा चमक उठा, आज की-सी खुशी कभी किसी ने नहीं पाई थी। महाराज जयसिंह के इशारे से कुमारी चंद्रकांता ने राजा सुरेंद्रसिंह के पैर पर सिर रखा, उन्होंने उसका सिर उठा कर चूमा।
घंटों तक मारे खुशी के सभी की अजब हालत रही।
कुँवर वीरेंद्रसिंह की दशा तो लिखनी ही मुश्किल है। अगर सिद्धनाथ योगी इनको पहले ही कुमारी से न मिलाए रहते तो इस समय इनको शर्म और हया कभी न दबा सकती, जरूर कोई बेअदबी हो जाती।
पोशाक वाली चपला और सब्ज पोशाक वाली चंपा साफ पहचानी गईं। मारे खुशी के सबों का चेहरा चमक उठा, आज की-सी खुशी कभी किसी ने नहीं पाई थी। महाराज जयसिंह के इशारे से कुमारी चंद्रकांता ने राजा सुरेंद्रसिंह के पैर पर सिर रखा, उन्होंने उसका सिर उठा कर चूमा।
घंटों तक मारे खुशी के सभी की अजब हालत रही।
कुँवर वीरेंद्रसिंह की दशा तो लिखनी ही मुश्किल है। अगर सिद्धनाथ योगी इनको पहले ही कुमारी से न मिलाए रहते तो इस समय इनको शर्म और हया कभी न दबा सकती, जरूर कोई बेअदबी हो जाती।