महाराज जयसिंह की तरफ देख कर सिद्धनाथ बाबा बोले – ‘आप कुमारी को हुक्म दीजिए कि अपनी सखियों के साथ घूमे-फिरे या दूसरे कमरे में चली जाए और आप लोग इस पहाड़ी और कुमारी का विचित्र हाल मुझसे सुनें।’
जयसिंह – ‘बहुत दिनों के बाद इसकी सूरत देखी है, अब कैसे अपने से अलग करूँ, कहीं ऐसा न हो कि फिर कोई आफत आए और इसको देखना मुश्किल हो जाए।’
बाबा जी – (हँस कर) ‘नहीं, नहीं, अब यह आपसे अलग नहीं हो सकती।’
जयसिंह – ‘खैर, जो हो, इसे मुझसे
महाराज जयसिंह की तरफ देख कर सिद्धनाथ बाबा बोले – ‘आप कुमारी को हुक्म दीजिए कि अपनी सखियों के साथ घूमे-फिरे या दूसरे कमरे में चली जाए और आप लोग इस पहाड़ी और कुमारी का विचित्र हाल मुझसे सुनें।’
जयसिंह – ‘बहुत दिनों के बाद इसकी सूरत देखी है, अब कैसे अपने से अलग करूँ, कहीं ऐसा न हो कि फिर कोई आफत आए और इसको देखना मुश्किल हो जाए।’
बाबा जी – (हँस कर) ‘नहीं, नहीं, अब यह आपसे अलग नहीं हो सकती।’
जयसिंह – ‘खैर, जो हो, इसे मुझसे