अलग मत कीजिए और कृपा करके इसका हाल शुरू से कहिए।’
बाबा जी – ‘अच्छा, जैसी आपकी मर्जी।’
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : उन्नीसवां बयान)
महाराज जयसिंह और सुरेंद्रसिंह के पूछने पर सिद्धनाथ बाबा ने इस दिलचस्प पहाड़ी और कुमारी चंद्रकांता का हाल कहना शुरू किया।
बाबा जी – ‘मुझे मालूम था कि यह पहाड़ी एक छोटा-सा तिलिस्म है और चुनारगढ़ के इलाके में भी कोई तिलिस्म है। जिसके हाथ से वह तिलिस्म टूटेगा उसकी शादी जिसके साथ होगी उसी के दहेज
अलग मत कीजिए और कृपा करके इसका हाल शुरू से कहिए।’
बाबा जी – ‘अच्छा, जैसी आपकी मर्जी।’
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : उन्नीसवां बयान)
महाराज जयसिंह और सुरेंद्रसिंह के पूछने पर सिद्धनाथ बाबा ने इस दिलचस्प पहाड़ी और कुमारी चंद्रकांता का हाल कहना शुरू किया।
बाबा जी – ‘मुझे मालूम था कि यह पहाड़ी एक छोटा-सा तिलिस्म है और चुनारगढ़ के इलाके में भी कोई तिलिस्म है। जिसके हाथ से वह तिलिस्म टूटेगा उसकी शादी जिसके साथ होगी उसी के दहेज