चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

चाहिये कि आपके राजा होने पर हमीं दोनों वजीर मुकर्रर किये जायंगे, और तब हम लोगों की चालाकी का तमाशा देखिये कि बात की बात में जमाना कैसे उलट पुलट कर देते हैं!”

क्रूरसिंह ने झटपट इस बात का भी एकरारनामा लिख दिया जिससे वे दोनों बहुत ही खुश हुए। इसके बाद नाजिमने कहा, “इस वक्त हम लोग चन्द्रकान्ता के हालचाल की खबर लेने जाते हैं क्योंकि यह शाम का वक्त बहुत अच्छा है, चन्द्रकान्ता जरूर बाग में गई होगी और अपनी सखी चपला से अपनी विरह कहानी कहती होगी,


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चाहिये कि आपके राजा होने पर हमीं दोनों वजीर मुकर्रर किये जायंगे, और तब हम लोगों की चालाकी का तमाशा देखिये कि बात की बात में जमाना कैसे उलट पुलट कर देते हैं!”

क्रूरसिंह ने झटपट इस बात का भी एकरारनामा लिख दिया जिससे वे दोनों बहुत ही खुश हुए। इसके बाद नाजिमने कहा, “इस वक्त हम लोग चन्द्रकान्ता के हालचाल की खबर लेने जाते हैं क्योंकि यह शाम का वक्त बहुत अच्छा है, चन्द्रकान्ता जरूर बाग में गई होगी और अपनी सखी चपला से अपनी विरह कहानी कहती होगी,


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