इसलिए हमको इसका पता लगाना कोई मुश्किल न होगा कि आजकल बीरेन्द्रसिंह और चन्द्रकान्ता के बीच में क्या हो रहा है।”
यह कह कर दोनों ऐयार क्रूरसिंह से बिदा हुए।
चन्द्रकान्ता ( पहला भाग : तीसरा बयान)
कुछ-कुछ दिन बाकी है, चन्द्रकान्ता, चपला और चम्पा बाग में टहल रही हैं। भीनी-भीनी फूलों की महक धीमी हवा के साथ मिलकर तबीयत को खुश कर रही है। तरह-तरह के फूल खिले हुए हैं। बाग के पश्चिम की तरफ वाले आम के घने पेड़ों की बहार और उसमें
इसलिए हमको इसका पता लगाना कोई मुश्किल न होगा कि आजकल बीरेन्द्रसिंह और चन्द्रकान्ता के बीच में क्या हो रहा है।”
यह कह कर दोनों ऐयार क्रूरसिंह से बिदा हुए।
चन्द्रकान्ता ( पहला भाग : तीसरा बयान)
कुछ-कुछ दिन बाकी है, चन्द्रकान्ता, चपला और चम्पा बाग में टहल रही हैं। भीनी-भीनी फूलों की महक धीमी हवा के साथ मिलकर तबीयत को खुश कर रही है। तरह-तरह के फूल खिले हुए हैं। बाग के पश्चिम की तरफ वाले आम के घने पेड़ों की बहार और उसमें