ने समझाईं जिनको खूब गौर के साथ कुमार ने सुना और तब पूछा, ‘‘तुमको कैसे मालूम हुआ कि चुनार से इतनी मदद इसको मिली है ?’’ तेजसिंह ने कहा, ‘‘किसी तरह मुझको मालूम हो गया, उसका हाल भी कभी आप पर जाहिर हो जायेगा, अब मैं रुखसत होता हूँ, राजा साहब या मेरे पिता मुझे पूछें तो जो मुनासिब हो सो कह दीजिएगा।
पहर रात रहे तेजसिंह ऐयारी के सामान से लैस होकर वहाँ से रवाना हो गये।
चपला बालादवी के लिए मर्दाने भेष में शहर से बाहर निकली। आधी
ने समझाईं जिनको खूब गौर के साथ कुमार ने सुना और तब पूछा, ‘‘तुमको कैसे मालूम हुआ कि चुनार से इतनी मदद इसको मिली है ?’’ तेजसिंह ने कहा, ‘‘किसी तरह मुझको मालूम हो गया, उसका हाल भी कभी आप पर जाहिर हो जायेगा, अब मैं रुखसत होता हूँ, राजा साहब या मेरे पिता मुझे पूछें तो जो मुनासिब हो सो कह दीजिएगा।
पहर रात रहे तेजसिंह ऐयारी के सामान से लैस होकर वहाँ से रवाना हो गये।
चपला बालादवी के लिए मर्दाने भेष में शहर से बाहर निकली। आधी