चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

रात बीत गई थी। साफ छिटकी हुई चाँदनी देख एकाएक जी में आया कि नौगढ़ चलूं और तेजसिंह से मुलाकात करूं। इसी खयाल से कदम बढ़ाये नौगढ़ की तरफ चली। उधर तेजसिंह अपनी असली सूरत में ऐयारी के सामान से सजे हुए विजयगढ़ की तरफ चले आ रहे थे। इत्तिफाक से दोनों की रास्ते ही में मुलाकात हो गयी। चपला ने पहिचान लिया और नजदीक जाकर, ‘‘असली बोली में पूछा, ‘‘कहिए आप कहाँ जा रहे हैं ?’’

तेजसिंह ने बोली से चपला को पहचाना और कहा, ‘‘वाह ! वाह !!


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रात बीत गई थी। साफ छिटकी हुई चाँदनी देख एकाएक जी में आया कि नौगढ़ चलूं और तेजसिंह से मुलाकात करूं। इसी खयाल से कदम बढ़ाये नौगढ़ की तरफ चली। उधर तेजसिंह अपनी असली सूरत में ऐयारी के सामान से सजे हुए विजयगढ़ की तरफ चले आ रहे थे। इत्तिफाक से दोनों की रास्ते ही में मुलाकात हो गयी। चपला ने पहिचान लिया और नजदीक जाकर, ‘‘असली बोली में पूछा, ‘‘कहिए आप कहाँ जा रहे हैं ?’’

तेजसिंह ने बोली से चपला को पहचाना और कहा, ‘‘वाह ! वाह !!


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