और पूछने लगे कि ‘आप कहाँ गये थे ? दोस्तों ने पूछा, ‘‘वह नालायक गंधी कहाँ गया और हम लोग बेहोश कैसे हो गये ?’’ दीवान साहब ने कहा, ‘‘वह चोर था, मैंने पहचान लिया। अच्छी तरह से उसका इत्र नहीं सूंघा, अगर सूंघता तो तुम्हारी तरह मैं भी बेहोश हो जाता। मैंने उसको पहचान कर पकड़ने का इरादा किया तो वह भागा, मैं भी गुस्से में उसके पीछे चला गया लेकिन वह निकल ही गया, अफसोस….!’’
इतने में लौंडी ने अर्ज किया, ‘‘कुछ भोजन कर लीजिए, सब-के-सब घर में भूखे बैठे हैं,
और पूछने लगे कि ‘आप कहाँ गये थे ? दोस्तों ने पूछा, ‘‘वह नालायक गंधी कहाँ गया और हम लोग बेहोश कैसे हो गये ?’’ दीवान साहब ने कहा, ‘‘वह चोर था, मैंने पहचान लिया। अच्छी तरह से उसका इत्र नहीं सूंघा, अगर सूंघता तो तुम्हारी तरह मैं भी बेहोश हो जाता। मैंने उसको पहचान कर पकड़ने का इरादा किया तो वह भागा, मैं भी गुस्से में उसके पीछे चला गया लेकिन वह निकल ही गया, अफसोस….!’’
इतने में लौंडी ने अर्ज किया, ‘‘कुछ भोजन कर लीजिए, सब-के-सब घर में भूखे बैठे हैं,