चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

कुमार चपला को देख उठ खड़े हुए और हाथ पकड़ अपने पास बैठा बातचीत करने लगे, चन्द्रकान्ता का हाल पूछा। चपला ने कहा, ‘‘अच्छी हैं, सिवाय आपकी याद के और किसी तरह की तकलीफ नहीं है, हमेशा कह करती हैं कि बड़े बेमुरौवत हैं, कभी खबर भी नहीं लेते कि जीती है या मर गई। आज घबड़ाकर मुझको भेजा है और यह दो नासपातियां अपने हाथ से छील-काटकर आपके वास्ते भेजी हैं तथा अपने सिर की कसम दी है कि इन्हें जरूर खाइएगा।’’ वीरेन्द्रसिंह चपला की बातें


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कुमार चपला को देख उठ खड़े हुए और हाथ पकड़ अपने पास बैठा बातचीत करने लगे, चन्द्रकान्ता का हाल पूछा। चपला ने कहा, ‘‘अच्छी हैं, सिवाय आपकी याद के और किसी तरह की तकलीफ नहीं है, हमेशा कह करती हैं कि बड़े बेमुरौवत हैं, कभी खबर भी नहीं लेते कि जीती है या मर गई। आज घबड़ाकर मुझको भेजा है और यह दो नासपातियां अपने हाथ से छील-काटकर आपके वास्ते भेजी हैं तथा अपने सिर की कसम दी है कि इन्हें जरूर खाइएगा।’’ वीरेन्द्रसिंह चपला की बातें


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