चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

सुन बहुत खुश हुए। चन्द्रकान्ता का इश्क पूरे दर्जे पर था, धोखे में आ गये, भले-बुरे की कुछ तमीज न रही, चन्द्रकान्ता की कसम कैसे टालते, झट नासपाती का टुकड़ा उठा लिया और मुंह से लगाया ही था कि सामने से आते हुए तेजसिंह दिखाई पड़े। तेजसिंह ने देखा कि वीरेन्द्रसिंह बैठे हैं, देखते ही आग हो गये। ललकार कर बोले, ‘‘खबरदार, मुंह में मत डालना !’’ इतना सुनते ही वीरेन्द्रसिंह रुक गये और बोले, ‘‘क्यों क्या है ?’’ तेजसिंह ने कहा, ‘‘मैं जाती बार हजार बार समझा गया,


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सुन बहुत खुश हुए। चन्द्रकान्ता का इश्क पूरे दर्जे पर था, धोखे में आ गये, भले-बुरे की कुछ तमीज न रही, चन्द्रकान्ता की कसम कैसे टालते, झट नासपाती का टुकड़ा उठा लिया और मुंह से लगाया ही था कि सामने से आते हुए तेजसिंह दिखाई पड़े। तेजसिंह ने देखा कि वीरेन्द्रसिंह बैठे हैं, देखते ही आग हो गये। ललकार कर बोले, ‘‘खबरदार, मुंह में मत डालना !’’ इतना सुनते ही वीरेन्द्रसिंह रुक गये और बोले, ‘‘क्यों क्या है ?’’ तेजसिंह ने कहा, ‘‘मैं जाती बार हजार बार समझा गया,


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