चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

हमेशा से तुम्हारा और कुंवर वीरेन्द्रसिंह का दोस्त हूँ, मुझको तुम लोगों की खिदमत करने में कोई उज्र नहीं। मैं तो आप हैरान था कि दोस्त आदमी को तेजसिंह ने क्यों कैद किया ? पहले तो मुझको यह भी नहीं मालूम हुआ कि मैं यहाँ कैसे आया, मर के आया हूँ या जीते जी, पर अहमद को देखा तो समझ गया कि यह तुम्हारी करामात है, भला यह तो कहो मुझको यहाँ रखकर तुमने क्या कार्रवाई की और अब मैं तुम्हारा क्या काम कर सकता हूँ?’’

तेजसिंह: मैं आपकी सूरत


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हमेशा से तुम्हारा और कुंवर वीरेन्द्रसिंह का दोस्त हूँ, मुझको तुम लोगों की खिदमत करने में कोई उज्र नहीं। मैं तो आप हैरान था कि दोस्त आदमी को तेजसिंह ने क्यों कैद किया ? पहले तो मुझको यह भी नहीं मालूम हुआ कि मैं यहाँ कैसे आया, मर के आया हूँ या जीते जी, पर अहमद को देखा तो समझ गया कि यह तुम्हारी करामात है, भला यह तो कहो मुझको यहाँ रखकर तुमने क्या कार्रवाई की और अब मैं तुम्हारा क्या काम कर सकता हूँ?’’

तेजसिंह: मैं आपकी सूरत


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