चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

बड़ा चालाक और फुर्तीला, कमर में सिर्फ खंजर बांधे, बगल में बटुआ लटकाये, हाथ में एक कमन्द लिए बड़ी तेजी के साथ चारों तरफ देखता और इनसे बातें करता जाता है। इन दोनों के सामने कसाकसाया चुस्त-दुरूस्त एक घोड़ा पेड़ से बंधा हुआ है।

कुंवर वीरेन्द्रसिंह कह रहे हैं,”भाई तेजसिंह, देखो मुहब्बत भी क्या बुरी बला है जिसने इस दर्जे तक पहुँचा दिया। कई दफे तुम विजयगड़ जाकर राजकुमारी चन्द्रकान्ता की चीठी मेरे पास लाये और मेरी चीठी उन तक


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बड़ा चालाक और फुर्तीला, कमर में सिर्फ खंजर बांधे, बगल में बटुआ लटकाये, हाथ में एक कमन्द लिए बड़ी तेजी के साथ चारों तरफ देखता और इनसे बातें करता जाता है। इन दोनों के सामने कसाकसाया चुस्त-दुरूस्त एक घोड़ा पेड़ से बंधा हुआ है।

कुंवर वीरेन्द्रसिंह कह रहे हैं,”भाई तेजसिंह, देखो मुहब्बत भी क्या बुरी बला है जिसने इस दर्जे तक पहुँचा दिया। कई दफे तुम विजयगड़ जाकर राजकुमारी चन्द्रकान्ता की चीठी मेरे पास लाये और मेरी चीठी उन तक


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