पहुँचाई जिससे साफ मालूम होता है कि जितनी मुहब्बत मैं चन्द्रकान्ता से रखता हूँ उतनी ही चन्द्रकान्ता मुझसे रखती है, और हमारे राज्य के बीच सिर्फ़ पाँच ही कोस का फासला भी है, तिस पर भी हमलोगों के किये कुछ नहीं बन पड़ता। देखो इस खत में भी चन्द्रकान्ता ने यही लिखा है कि ‘जिस तरह बने जल्द मिल जाओ।”
तेजसिंह ने जवाब दिया, “मैं हर तरह से आपको वहां ले जा सकता हूँ मगर एक तो आजकल चन्द्रकान्ता के पिता महाराज जयसिंह ने महल के चारों तरफ सख्त पहरा बैठा रक्खा है,
पहुँचाई जिससे साफ मालूम होता है कि जितनी मुहब्बत मैं चन्द्रकान्ता से रखता हूँ उतनी ही चन्द्रकान्ता मुझसे रखती है, और हमारे राज्य के बीच सिर्फ़ पाँच ही कोस का फासला भी है, तिस पर भी हमलोगों के किये कुछ नहीं बन पड़ता। देखो इस खत में भी चन्द्रकान्ता ने यही लिखा है कि ‘जिस तरह बने जल्द मिल जाओ।”
तेजसिंह ने जवाब दिया, “मैं हर तरह से आपको वहां ले जा सकता हूँ मगर एक तो आजकल चन्द्रकान्ता के पिता महाराज जयसिंह ने महल के चारों तरफ सख्त पहरा बैठा रक्खा है,