चपला की लाश की टांग काट ली और महाराज को दिखलाकर बोले, “देखिए इसमें कहीं हड्डी है।” महाराज ने गौर से देखकर कहा, “ठीक है, बनावटी लाश है।” इसके पीछे चंद्रकान्ता की लाश को भी इसी तरह देखा, उसमें भी हड्डी नहीं पाई। अब सबों को मालूम हो गया कि ऐयारी की गई है। महाराज बोले, “अच्छा यह तो मालूम हुआ कि चंद्रकान्ता जीती है, मगर दुश्मनों के हाथ पड़ गई इसका गम क्या कम है?” तेजसिंह बोले, “कोई हर्ज नहीं, अब तो जो होना था हो चुका। मैं चंद्रकान्ता और चपला को खोज निकालूंगा।”
चपला की लाश की टांग काट ली और महाराज को दिखलाकर बोले, “देखिए इसमें कहीं हड्डी है।” महाराज ने गौर से देखकर कहा, “ठीक है, बनावटी लाश है।” इसके पीछे चंद्रकान्ता की लाश को भी इसी तरह देखा, उसमें भी हड्डी नहीं पाई। अब सबों को मालूम हो गया कि ऐयारी की गई है। महाराज बोले, “अच्छा यह तो मालूम हुआ कि चंद्रकान्ता जीती है, मगर दुश्मनों के हाथ पड़ गई इसका गम क्या कम है?” तेजसिंह बोले, “कोई हर्ज नहीं, अब तो जो होना था हो चुका। मैं चंद्रकान्ता और चपला को खोज निकालूंगा।”