चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



तेजसिंह के समझाने से सबों को कुछ ढाढ़स हुई, मगर कुमार वीरेन्द्रसिंह अभी तक बदहवास पड़े हैं, उनको इन सब बातों की कुछ खबर नहीं। अब महाराज को यह फिक्र हुई कि कुमार को होशियार करना चाहिए। वैद्य बुलाए गये, सबों ने बहुत-सी तरकीबें कीं मगर कुमार को होश न आया। तेजसिंह भी अपनी तरकीब करके हैरान हो गए मगर कोई फायदा न हुआ, यह देख महाराज बहुत घबड़ाए और तेजसिंह से बोले, “अब क्या करना चाहिए?” बहुत देर तक गौर करने के बाद तेजसिंह ने


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तेजसिंह के समझाने से सबों को कुछ ढाढ़स हुई, मगर कुमार वीरेन्द्रसिंह अभी तक बदहवास पड़े हैं, उनको इन सब बातों की कुछ खबर नहीं। अब महाराज को यह फिक्र हुई कि कुमार को होशियार करना चाहिए। वैद्य बुलाए गये, सबों ने बहुत-सी तरकीबें कीं मगर कुमार को होश न आया। तेजसिंह भी अपनी तरकीब करके हैरान हो गए मगर कोई फायदा न हुआ, यह देख महाराज बहुत घबड़ाए और तेजसिंह से बोले, “अब क्या करना चाहिए?” बहुत देर तक गौर करने के बाद तेजसिंह ने


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