“चंद्रकान्ता मरी नहीं, जीती है, वह देखो महाराज शिवदत्त के ऐयार उसे लिए जाते हैं ! जल्दी दौड़ो, छीनो, नहीं तो बस ले ही जायेंगे! क्या इसी को वीरता कहते हैं! छी:, चंद्रकान्ता को दुश्मन लिए जायं और आप देखकर भी कुछ न बोलें? राम राम राम!”
इतनी आवाज कान में पड़ते ही कुमार में आंखें खोल दीं और घबड़ाकर बोले, “हैं! कौन लिए जाता है? कहां है चंद्रकान्ता?” यह कहकर इधर-उधर देखने लगे। देखा तो तेजसिंह बैठे हैं। पूछा-”अभी कौन कह रहा
“चंद्रकान्ता मरी नहीं, जीती है, वह देखो महाराज शिवदत्त के ऐयार उसे लिए जाते हैं ! जल्दी दौड़ो, छीनो, नहीं तो बस ले ही जायेंगे! क्या इसी को वीरता कहते हैं! छी:, चंद्रकान्ता को दुश्मन लिए जायं और आप देखकर भी कुछ न बोलें? राम राम राम!”
इतनी आवाज कान में पड़ते ही कुमार में आंखें खोल दीं और घबड़ाकर बोले, “हैं! कौन लिए जाता है? कहां है चंद्रकान्ता?” यह कहकर इधर-उधर देखने लगे। देखा तो तेजसिंह बैठे हैं। पूछा-”अभी कौन कह रहा