था कि चंद्रकान्ता जीती है और उसको दुश्मन लिये जाते हैं?” तेजसिंह ने कहा, “मैं कहता था और सच कह रहा था! कुमारी जीती हैं मगर दुश्मन उनको चुरा ले गए हैं और उनकी जगह नकली लाश रख इधर-उधर रंग फैला दिया है जिससे लोग कुमारी को मरी हुई जानकर पीछा और खोज न करें।”
कुमार ने कहा, “तुम हमें धोखा देते हो! हम कैसे जानें कि वह लाश नकली है?” तेजसिंह ने कहा, “मैं अभी आपको यकीन करा देता हूं।” यह कह कमरे का दरवाजा खोला, देखा कि महाराज खड़े हैं,
था कि चंद्रकान्ता जीती है और उसको दुश्मन लिये जाते हैं?” तेजसिंह ने कहा, “मैं कहता था और सच कह रहा था! कुमारी जीती हैं मगर दुश्मन उनको चुरा ले गए हैं और उनकी जगह नकली लाश रख इधर-उधर रंग फैला दिया है जिससे लोग कुमारी को मरी हुई जानकर पीछा और खोज न करें।”
कुमार ने कहा, “तुम हमें धोखा देते हो! हम कैसे जानें कि वह लाश नकली है?” तेजसिंह ने कहा, “मैं अभी आपको यकीन करा देता हूं।” यह कह कमरे का दरवाजा खोला, देखा कि महाराज खड़े हैं,