राज्य का काम देखें। मैं जाता हूं, जरा देखूं तो राजा शिवदत्त कितनी बहादुरी रखता है, अभी आपको तकलीफ करने की कुछ जरूरत नहीं।”
थोड़ी देर तक बातचीत होने के बाद महाराज उठकर महल में चले गए। कुमार और तेजसिंह भी स्नान और संध्या-पूजा की फिक्र में उठे। सबसे जल्दी तेजसिंह ने छुट्टी पाई और मुनादी वाले को बुलाकर हुक्म दिया कि तू तमाम शहर में इस बात की मुनादी कर आ कि-‘दन्तारबीर का जिसको इष्ट हो वह तेजसिंह के पास हाजिर हो।’ बमूजिब हुक्म
राज्य का काम देखें। मैं जाता हूं, जरा देखूं तो राजा शिवदत्त कितनी बहादुरी रखता है, अभी आपको तकलीफ करने की कुछ जरूरत नहीं।”
थोड़ी देर तक बातचीत होने के बाद महाराज उठकर महल में चले गए। कुमार और तेजसिंह भी स्नान और संध्या-पूजा की फिक्र में उठे। सबसे जल्दी तेजसिंह ने छुट्टी पाई और मुनादी वाले को बुलाकर हुक्म दिया कि तू तमाम शहर में इस बात की मुनादी कर आ कि-‘दन्तारबीर का जिसको इष्ट हो वह तेजसिंह के पास हाजिर हो।’ बमूजिब हुक्म