चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

अपने अरबी घोड़े पर सवार हो मैदान में गये और देवीसिंह से कहा, “शिवदत्त को कहना चाहिए कि बहुत से आदमियों का खून कराना अच्छा नहीं, जिस-जिस को बहादुरी का घमण्ड हो एक पर एक लड़ के जल्दी मामला तै कर लें। शिवदत्तसिंह अपने को अर्जुन समझते हैं, उनके मुकाबले के लिए मैं मौजूद हूं, क्यों बेचारे गरीब सिपाहियों की जान जाय।”

देवीसिंह ने कहा, “बहुत अच्छा, अभी इस मामले को तै कर डालता हूं!” यह कह मैदान में गये और अपनी चादर हवा में दो-तीन


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अपने अरबी घोड़े पर सवार हो मैदान में गये और देवीसिंह से कहा, “शिवदत्त को कहना चाहिए कि बहुत से आदमियों का खून कराना अच्छा नहीं, जिस-जिस को बहादुरी का घमण्ड हो एक पर एक लड़ के जल्दी मामला तै कर लें। शिवदत्तसिंह अपने को अर्जुन समझते हैं, उनके मुकाबले के लिए मैं मौजूद हूं, क्यों बेचारे गरीब सिपाहियों की जान जाय।”

देवीसिंह ने कहा, “बहुत अच्छा, अभी इस मामले को तै कर डालता हूं!” यह कह मैदान में गये और अपनी चादर हवा में दो-तीन


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