चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

दफे उछाली। चादर उछालनी थी कि झट बद्रीनाथ ऐयार महाराज शिवद्त्त के लश्कर से निकल के मैदान में देवीसिंह के पास आये और बोले, “जय माया की!” देवीसिंह ने भी जवाब दिया, “जय माया की!” बद्रीनाथ ने पूछा, “क्यों क्या बात है जो मैदान में आकर ऐयारों को बुलाते हो?”

देवी-तुमसे एक बात कहनी है!

बद्री-कहो।

देवी-तुम्हारी फौज में मर्द बहुत हैं कि औरत?

बद्री-औरत की सूरत भी दिखाई नहीं देती!

देवी-तुम्हारे यहां कोई बहादुर भी है कि सब गरीब


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दफे उछाली। चादर उछालनी थी कि झट बद्रीनाथ ऐयार महाराज शिवद्त्त के लश्कर से निकल के मैदान में देवीसिंह के पास आये और बोले, “जय माया की!” देवीसिंह ने भी जवाब दिया, “जय माया की!” बद्रीनाथ ने पूछा, “क्यों क्या बात है जो मैदान में आकर ऐयारों को बुलाते हो?”

देवी-तुमसे एक बात कहनी है!

बद्री-कहो।

देवी-तुम्हारी फौज में मर्द बहुत हैं कि औरत?

बद्री-औरत की सूरत भी दिखाई नहीं देती!

देवी-तुम्हारे यहां कोई बहादुर भी है कि सब गरीब


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