सिपाहियों की जान लेने और आप तमाशा देखने वाले ही हैं?
बद्री-हमारे यहां खचियों बहादुर भरे हैं?
देवी-तुम्हारे कहने से तो मालूम होता है कि सब खेत की मूली ही हैं!
बद्री-यह तो मुकाबला होने ही से मालूम होगा!
देवी-तो क्यों नहीं एक पर एक लड़ के हौसला निकाल लेते? ऐसा करने से मामला भी जल्द तै हो जायगा और बेचारे सिपाहियों की जानें भी मुफ्त में न जायेंगी। हमारे कुमार तो कहते हैं कि महाराज शिवदत्त को अपनी बहादुरी का बड़ा भरोसा है,
सिपाहियों की जान लेने और आप तमाशा देखने वाले ही हैं?
बद्री-हमारे यहां खचियों बहादुर भरे हैं?
देवी-तुम्हारे कहने से तो मालूम होता है कि सब खेत की मूली ही हैं!
बद्री-यह तो मुकाबला होने ही से मालूम होगा!
देवी-तो क्यों नहीं एक पर एक लड़ के हौसला निकाल लेते? ऐसा करने से मामला भी जल्द तै हो जायगा और बेचारे सिपाहियों की जानें भी मुफ्त में न जायेंगी। हमारे कुमार तो कहते हैं कि महाराज शिवदत्त को अपनी बहादुरी का बड़ा भरोसा है,