कभी चीट्ठी नहीं भेजेंगे। यह सोच-समझ चपला शरमा गई और गर्दन नीची कर चुप हो रही, मगर जी में तेजसिंह की सफाई और चालाकी की तारीफ करने लगी, बल्कि सच तो यह है कि तेजसिंह की मुहब्बत ने उसके दिल में जगह बना ली।
चन्द्रकान्ता ने बड़ी मुहब्बत से वीरेन्द्रसिंह का खत पढ़ा और तब तेजसिंह से बातचीत करने लगी-
चन्द्रकान्ता: क्यों तेजसिंह, उनका मिजाज तो अच्छा है ?
तेजसिंह: मिजाज क्या खाक अच्छा होगा ? खाना-पीना सब छूट गया, रोते-रोते आँखें सूज आईं,
कभी चीट्ठी नहीं भेजेंगे। यह सोच-समझ चपला शरमा गई और गर्दन नीची कर चुप हो रही, मगर जी में तेजसिंह की सफाई और चालाकी की तारीफ करने लगी, बल्कि सच तो यह है कि तेजसिंह की मुहब्बत ने उसके दिल में जगह बना ली।
चन्द्रकान्ता ने बड़ी मुहब्बत से वीरेन्द्रसिंह का खत पढ़ा और तब तेजसिंह से बातचीत करने लगी-
चन्द्रकान्ता: क्यों तेजसिंह, उनका मिजाज तो अच्छा है ?
तेजसिंह: मिजाज क्या खाक अच्छा होगा ? खाना-पीना सब छूट गया, रोते-रोते आँखें सूज आईं,