चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

दिन-रात तुम्हारा ध्यान है, बिना तुम्हारे मिले उनको कब आराम है। हजार समझाता हूँ मगर कौन सुनता है ! अभी उसी दिन तुम्हारी चिट्ठी लेकर मैं गया था, आज उनकी हालत देख फिर यहाँ आना पड़ा। कहते थे कि मैं खुद चलूंगा, किसी तरह समझा-बुझाकर यहाँ आने से रोका और कहा कि आज मुझको जाने दो, मैं जाकर वहाँ बन्दोबस्त कर आऊं तब तुमको ले चलूंगा जिससे किसी तरह का नुकसान न हो।

चन्द्रकान्ता: अफसोस ! तुम उनको अपने साथ न लाये, कम-से-कम मैं उनका दर्शन


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दिन-रात तुम्हारा ध्यान है, बिना तुम्हारे मिले उनको कब आराम है। हजार समझाता हूँ मगर कौन सुनता है ! अभी उसी दिन तुम्हारी चिट्ठी लेकर मैं गया था, आज उनकी हालत देख फिर यहाँ आना पड़ा। कहते थे कि मैं खुद चलूंगा, किसी तरह समझा-बुझाकर यहाँ आने से रोका और कहा कि आज मुझको जाने दो, मैं जाकर वहाँ बन्दोबस्त कर आऊं तब तुमको ले चलूंगा जिससे किसी तरह का नुकसान न हो।

चन्द्रकान्ता: अफसोस ! तुम उनको अपने साथ न लाये, कम-से-कम मैं उनका दर्शन


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