वे कैसे होंगे, मेरी याद करके कितने दु:खी होते होंगे!” धीरे- धीरे यही कह के रो रही थीं। चंपा उनको समझाने लगी-
“महारानी, सब्र करो, घबराओ मत, मुझे पूरी उम्मीद हो गई, ईश्वर चाहेगा तो अब हम लोग बहुत जल्दी छूट जायेंगे। क्या करूं, मैं हथकड़ी-बेड़ी में पड़ी हूं, किसी तरह यह खुल जातीं तो इन लोगों को मजा चखाती, लाचार हूं कि यह मजबूत बेड़ी सिवाय कटने के दूसरी तरह खुल नहीं सकती और इसका कटना यहां मुश्किल है।”
इसी तरह रोते-कलपते
वे कैसे होंगे, मेरी याद करके कितने दु:खी होते होंगे!” धीरे- धीरे यही कह के रो रही थीं। चंपा उनको समझाने लगी-
“महारानी, सब्र करो, घबराओ मत, मुझे पूरी उम्मीद हो गई, ईश्वर चाहेगा तो अब हम लोग बहुत जल्दी छूट जायेंगे। क्या करूं, मैं हथकड़ी-बेड़ी में पड़ी हूं, किसी तरह यह खुल जातीं तो इन लोगों को मजा चखाती, लाचार हूं कि यह मजबूत बेड़ी सिवाय कटने के दूसरी तरह खुल नहीं सकती और इसका कटना यहां मुश्किल है।”
इसी तरह रोते-कलपते