चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

लगावट बहुत बुरी मालूम होती है। अपने बाप के जरिये उसने महाराज जयसिंह के कान तक आपकी लगावट का हाल पहुँचा दिया है और इसी सबब से पहरे की यह सख्त तकीद हो गई है। आपको ले चलना अभी मुझे पसन्द नहीं जब तक कि मैं वहां जाकर फसादियों को गिरफ्तार न कर लूं।

“इस वक्त मैं फिर विजयगढ जाकर चन्द्रकान्ता और चपला से मुलाकात करता हूँ क्योंकि चपला ऐयारा और चन्द्रकान्ता की प्यारी सखी है और चन्द्रकान्ता को जान से ज्यादा मानती है। सिवाय इस चपला


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लगावट बहुत बुरी मालूम होती है। अपने बाप के जरिये उसने महाराज जयसिंह के कान तक आपकी लगावट का हाल पहुँचा दिया है और इसी सबब से पहरे की यह सख्त तकीद हो गई है। आपको ले चलना अभी मुझे पसन्द नहीं जब तक कि मैं वहां जाकर फसादियों को गिरफ्तार न कर लूं।

“इस वक्त मैं फिर विजयगढ जाकर चन्द्रकान्ता और चपला से मुलाकात करता हूँ क्योंकि चपला ऐयारा और चन्द्रकान्ता की प्यारी सखी है और चन्द्रकान्ता को जान से ज्यादा मानती है। सिवाय इस चपला


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