कोई तो सबब होना चाहिए! अब मुझे आज्ञा हो तो बिदा होऊं।
कुमार-अच्छा जाओ।
ज्यो-अच्छा हमारी तरफ नहीं होते तो न सही मगर ऐयारी तो बंद करो।
तेज-वाह ज्योतिषीजी, आखिर वेदपाठी ही रहे। ऐयारी से क्या डरना? ये लोग जितना जी चाहें जोर लगा लें!
पन्ना-खैर देखा जायगा, अभी तो जाते है, जय माया की!
तेज-जय माया की!
बद्रीनाथ वगैरह वहां से चले गए। फिर कुमार भी तिलिस्म में न गये और अपने डेरे में चले आए। रात को कुमार के डेरे में सब ऐयार
कोई तो सबब होना चाहिए! अब मुझे आज्ञा हो तो बिदा होऊं।
कुमार-अच्छा जाओ।
ज्यो-अच्छा हमारी तरफ नहीं होते तो न सही मगर ऐयारी तो बंद करो।
तेज-वाह ज्योतिषीजी, आखिर वेदपाठी ही रहे। ऐयारी से क्या डरना? ये लोग जितना जी चाहें जोर लगा लें!
पन्ना-खैर देखा जायगा, अभी तो जाते है, जय माया की!
तेज-जय माया की!
बद्रीनाथ वगैरह वहां से चले गए। फिर कुमार भी तिलिस्म में न गये और अपने डेरे में चले आए। रात को कुमार के डेरे में सब ऐयार