तुम्हारा जहां जी चाहे घूमना, हम उसके साथ इधर-उधर फिरेंगे।” तेजसिंह ने फिर समझाया कि कहीं शिवदत्त के ऐयार लोग आपको धोखे में न फंसा लें, मगर कुमार ने एक मानी, आखिर लाचार होकर कुमार और फतहसिंह को साथ ले जंगल की तरफ रवाना हुए।
थोड़ी दूर घने जंगल में जाकर उन लोगों को एक जगह बैठाकर तीनों ऐयार अलग-अलग उन औरतों की खोज में रवाना हुए। ऐयारों के चले जाने पर कुंअर वीरेन्द्रसिंह फतहसिंह से बातें करने लगे मगर सिवाय वनकन्या के कोई दूसरा जिक्र कुमार की जुबान पर न था।
तुम्हारा जहां जी चाहे घूमना, हम उसके साथ इधर-उधर फिरेंगे।” तेजसिंह ने फिर समझाया कि कहीं शिवदत्त के ऐयार लोग आपको धोखे में न फंसा लें, मगर कुमार ने एक मानी, आखिर लाचार होकर कुमार और फतहसिंह को साथ ले जंगल की तरफ रवाना हुए।
थोड़ी दूर घने जंगल में जाकर उन लोगों को एक जगह बैठाकर तीनों ऐयार अलग-अलग उन औरतों की खोज में रवाना हुए। ऐयारों के चले जाने पर कुंअर वीरेन्द्रसिंह फतहसिंह से बातें करने लगे मगर सिवाय वनकन्या के कोई दूसरा जिक्र कुमार की जुबान पर न था।