चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



चन्द्रकान्ता ( तीसरा भाग : दूसरा बयान)

कुंअर वीरेन्द्रसिंह बैठे फतहसिंह से बातें कर रहे थे कि एक मालिन जो जवान और कुछ खूबसूरत भी थी हाथ में जंगली फूलों की डाली लिये कुमार के बगल से इस तरह निकली जैसे उसको यह मालूम नहीं कि यहां कोई है। मुंह से कहती जाती थी-”आज जंगली फूलों का गहना बनाने में देर हो गई, जरूर कुमारी खफा होंगी, देखें क्या दुर्दशा होती है।”

इस बात को दोनों ने सुना। कुमार ने फतहसिंह से कहा, “मालूम होता है यह उन्हीं की मालिन है,


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चन्द्रकान्ता ( तीसरा भाग : दूसरा बयान)

कुंअर वीरेन्द्रसिंह बैठे फतहसिंह से बातें कर रहे थे कि एक मालिन जो जवान और कुछ खूबसूरत भी थी हाथ में जंगली फूलों की डाली लिये कुमार के बगल से इस तरह निकली जैसे उसको यह मालूम नहीं कि यहां कोई है। मुंह से कहती जाती थी-”आज जंगली फूलों का गहना बनाने में देर हो गई, जरूर कुमारी खफा होंगी, देखें क्या दुर्दशा होती है।”

इस बात को दोनों ने सुना। कुमार ने फतहसिंह से कहा, “मालूम होता है यह उन्हीं की मालिन है,


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