चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

यह सुन फतहसिंह बद्रीनाथ को ले अपने खेमे में चले गये। शाम को बल्कि कुछ रात बीते तेजसिंह, देवीसिंह और ज्योतिषीजी लौटकर आये और कुमार के खेमे में गए। उन्होंने पूछा, “कहो कुछ पता लगा?”

तेजसिंह-कुछ पता न लगा, दिन भर परेशान हुए मगर कोई काम न चला।

कुमार-(ऊंची सांस लेकर) फिर अब क्या किया जायेगा?

तेज-किया क्या जायेगा, आज-कल में पता लगेगा ही।

कुमार-हमने भी एक ऐयार को गिरफ्तार किया है।

तेज-हैं, किसको? वह कहां है!

कुमार-फतहसिंह के पहरे में है, उसको बुला के देखो कौन है!


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यह सुन फतहसिंह बद्रीनाथ को ले अपने खेमे में चले गये। शाम को बल्कि कुछ रात बीते तेजसिंह, देवीसिंह और ज्योतिषीजी लौटकर आये और कुमार के खेमे में गए। उन्होंने पूछा, “कहो कुछ पता लगा?”

तेजसिंह-कुछ पता न लगा, दिन भर परेशान हुए मगर कोई काम न चला।

कुमार-(ऊंची सांस लेकर) फिर अब क्या किया जायेगा?

तेज-किया क्या जायेगा, आज-कल में पता लगेगा ही।

कुमार-हमने भी एक ऐयार को गिरफ्तार किया है।

तेज-हैं, किसको? वह कहां है!

कुमार-फतहसिंह के पहरे में है, उसको बुला के देखो कौन है!


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