चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



देवीसिंह को भेजकर फतहसिंह को मय ऐयार के बुलवाया। जब बद्रीनाथ की सूरत देखी तो खुश हो गये और बोले, “क्यों, अब क्या इरादा है?”

बद्री-इरादा जो पहले था वही अब भी है?

तेज-अब भी शिवदत्त का साथ छोड़ोगे या नहीं?

बद्री-महाराज शिवदत्त का साथ क्यों छोड़ने लगे?

तेज-तो फिर कैद हो जाओगे।

बद्री-चाहे जो हो।

तेज-यह न समझना कि तुम्हारे साथी लोग छुड़ा ले जायेंगे, हमारा कैदखाना ऐसा नहीं है।

बद्री-उस कैदखाने का हाल भी मालूम है, वहां भेजो भी तो सही।


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देवीसिंह को भेजकर फतहसिंह को मय ऐयार के बुलवाया। जब बद्रीनाथ की सूरत देखी तो खुश हो गये और बोले, “क्यों, अब क्या इरादा है?”

बद्री-इरादा जो पहले था वही अब भी है?

तेज-अब भी शिवदत्त का साथ छोड़ोगे या नहीं?

बद्री-महाराज शिवदत्त का साथ क्यों छोड़ने लगे?

तेज-तो फिर कैद हो जाओगे।

बद्री-चाहे जो हो।

तेज-यह न समझना कि तुम्हारे साथी लोग छुड़ा ले जायेंगे, हमारा कैदखाना ऐसा नहीं है।

बद्री-उस कैदखाने का हाल भी मालूम है, वहां भेजो भी तो सही।


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