देवीसिंह को भेजकर फतहसिंह को मय ऐयार के बुलवाया। जब बद्रीनाथ की सूरत देखी तो खुश हो गये और बोले, “क्यों, अब क्या इरादा है?”
बद्री-इरादा जो पहले था वही अब भी है?
तेज-अब भी शिवदत्त का साथ छोड़ोगे या नहीं?
बद्री-महाराज शिवदत्त का साथ क्यों छोड़ने लगे?
तेज-तो फिर कैद हो जाओगे।
बद्री-चाहे जो हो।
तेज-यह न समझना कि तुम्हारे साथी लोग छुड़ा ले जायेंगे, हमारा कैदखाना ऐसा नहीं है।
बद्री-उस कैदखाने का हाल भी मालूम है, वहां भेजो भी तो सही।
देवीसिंह को भेजकर फतहसिंह को मय ऐयार के बुलवाया। जब बद्रीनाथ की सूरत देखी तो खुश हो गये और बोले, “क्यों, अब क्या इरादा है?”
बद्री-इरादा जो पहले था वही अब भी है?
तेज-अब भी शिवदत्त का साथ छोड़ोगे या नहीं?
बद्री-महाराज शिवदत्त का साथ क्यों छोड़ने लगे?
तेज-तो फिर कैद हो जाओगे।
बद्री-चाहे जो हो।
तेज-यह न समझना कि तुम्हारे साथी लोग छुड़ा ले जायेंगे, हमारा कैदखाना ऐसा नहीं है।
बद्री-उस कैदखाने का हाल भी मालूम है, वहां भेजो भी तो सही।